लासा वायरस के संक्रमण में भी शुरुआत में कोई खास लक्षण नहीं दिखता है। हालांकि इस बीमारी में मृत्यु दर ज्यादा नहीं है, लेकिन 80 प्रतिशत मामलों में कोई लक्षण नहीं दिखता है। यूरोपियन सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के मुताबिक इस बीमारी का अब तक कोई इलाज नहीं है। कुछ मरीजों बहुत अधिक जटिलताएं पैदा हो जाती हैं, जिसके कारण अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है। अस्पताल पहुंचे 15 प्रतिशत मरीजों की मौत हो जाती है।
क्या है लासा वायरस
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक इस बीमारी की सबसे पहले खोज 1969 में पश्चिमी अफ्रीकी देश नाइजीरिया के लासा नामक स्थान में हुई। इसके बारे में तब पता चला जब इस बीमारी से दो नर्सों की मौत हो गई. लासा वायरस के संक्रमण में सबसे पहले बुखार लगता है। यह चूहों से इंसानों में पहुंचता है। सियरा लियोन, नाइजीरिया, गिनी और लाइबेरिया में यह महामारी के रूप में घोषित है।
कैसे फैलती है यह बीमारी
यह बीमारी चूहों से इंसान में फैलता है। दरअसल, चूहों के मल- मूत्र या उनके द्वारा दूषित भोजन को खाने से इस बीमारी का संक्रमण हो सकता है। हालांकि संक्रमित मरीज को छूने से या उसके पास होने से इस बीमारी का संक्रमण बहुत ही मुश्किल है। अगर संक्रमित व्यक्ति के तरल पदार्थ से कोई दूसरा व्यक्ति संपर्क में आता है तो उसे भी यह बीमारी हो सकती है। दूसरी ओर जब तक व्यक्ति में लक्षण नहीं दिखता तब तक उससे दूसरा व्यक्ति संक्रमित नहीं हो सकता। इसके अलावा मरीज से गले लगने, हाथ मिलाने या मरीज के पास बैठने से इस बीमारी का संक्रमण नहीं हो सकता।
बचाव का तरीका
यह बीमारी चूहों से फैलती है। इसलिए हमेशा चूहों से दूर रहा जाए। भोजन को हर हाल में चूहों के संपर्क में नहीं आने देना चाहिए। चूहों को न सिर्फ उन इलाकों से जहां यह बीमारी है बल्कि अन्य जगहों से भी भगा देना चाहिए।
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